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Iran के Supreme Leader की मौत पर आंसू क्यों बहा रहे भारतीय मुसलमान? : Sandarbh

Iran के Supreme Leader की मौत पर आंसू क्यों बहा रहे भारतीय मुसलमान? : Sandarbh

36 साल तक ईरान की सत्ता पर काबिज़ रहने वाले अली ख़ामेनेई आखिर कौन हैं? एक ऐसा व्यक्ति जिसने जेल, जंग, क्रांति और सियासत के बीच अपना रास्ता बनाया और ईरान का सुप्रीम लीडर बन गया। कहानी शुरू होती है शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के दौर से, जब ईरान में राजशाही के खिलाफ गुस्सा धीरे-धीरे उबल रहा था।
 1979 की इस्लामिक क्रांति ने पूरे ईरान की राजनीति बदल दी और आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। लेकिन क्रांति के बाद भी कहानी खत्म नहीं हुई। जेल, हमले, जंग और सत्ता के संघर्ष के बीच अली ख़ामेनेई का राजनीतिक सफर आगे बढ़ता गया।
1980 में ईरान-इराक युद्ध, सद्दाम हुसैन के साथ लंबी लड़ाई, अमेरिकी दूतावास बंधक संकट (Iran Hostage Crisis), और फिर ईरान की राजनीति में लगातार बदलते समीकरण–इन सबके बीच अली ख़ामेनेई धीरे-धीरे ईरान की सबसे ताकतवर कुर्सी तक पहुंचे।
समय के साथ ईरान में कई बड़े विवाद भी सामने आए –हिजाब कानून,महसा अमीनी की मौत के बाद हुए हिजाब प्रोटेस्ट, स्टूडेंट आंदोलन, और ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम।
आज भी दुनिया की राजनीति में ईरान, उसका परमाणु कार्यक्रम और सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई एक बड़ा मुद्दा बने हुए हैं।
इस वीडियो में हम तलाशेंगे इन सवालों के जवाब:
मस्जिदों में सीडी बांटने वाला कैसे बना ईरान का सुप्रीम लीडर?
1979 की Islamic Revolution ने ईरान को कैसे बदल दिया?
शाह से सुप्रीम लीडर तक अली ख़ामेनेई का सफर कैसा रहा?
Iran-Iraq War और Saddam Hussein के साथ जंग का क्या असर हुआ?
Mahsa Amini और Hijab Protest ने ईरान की राजनीति को कैसे हिला दिया?
ईरान का Nuclear Program दुनिया के लिए इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?
और क्यों ईरान के सुप्रीम लीडर की खबरों पर भारत तक बहस छिड़ जाती है?
 

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