
11 मार्च 2025. दुनियाभर ने एक आवाज़ सुनी. ये आवाज़ जाफ़र एक्सप्रेस में हुए बम धमाके की थी. इस हमले की ज़िम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी नाम के संगठन ने ली. ये संगठन बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की एक बड़ी और लंबी मुहिम का हिस्सा है. बड़ी मुहिम इसलिए क्योंकि इसी मुहिम से जुड़े लोगों ने पाकिस्तानी सरकार और आर्मी को नाकों चने चबवा रखे हैं. लंबी मुहिम इसलिए क्योंकि ये पाकिस्तान के बनते ही शुरू हो गई थी, लेकिन ये सब यूं ही पल भर में नहीं हुआ. इस कहानी में क़ायदे-आज़म मोहम्मद अली जिन्ना का दिया गया धोखा, पाकिस्तानी सेना के जनरलों का ज़ुल्म और हज़ारों लोगों का गायब होना शामिल है. ये दास्तां सनी है हुक्मरानों के विश्वासघातों से, बलूचों के खून से, आम लोगों की टूटी उम्मीदों से. इसमें असंख्य किरदार हैं नवाब नौरौज़ खां, अकबर बुग्ती और महरंग बलोच जैसे...बलूचिस्तान के हवाले से आती रही ख़बरों के पीछे कितनी हकीकत है, कितनी अफवाह.. और कितनी परतें.. उनसे अधिकतर लोग अनजान हैं, लेकिन हर अधूरी कड़ी को जोड़ हम यहां आपसे साझा कर रहे हैं उसका संदर्भ. आजतक रेडियो के एक्सप्लेनर पॉडकास्ट ‘संदर्भ’ में आपको बलूचिस्तान के संघर्ष का हर पहलू आपको समझ आए यही कोशिश है.
प्रड्यूसर: मानव देव रावत
साउंड मिक्स: सूरज सिंह

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