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जिसने जलियांवाला बाग के कसाई को अपनी आंखों से देखा : पढ़ाकू नितिन, Ep 12

जिसने जलियांवाला बाग के कसाई को अपनी आंखों से देखा : पढ़ाकू नितिन, Ep 12

आज से 102 साल पहले जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों का बेरहमी से खून बहाया था, जिसके बाद उन्हें अमृतसर का कसाई कहा जाने लगा. वो दर्दनाक मंज़र अपनी आँखों से एक लड़के ने देखा था. बाद में उसने आपबीती लिखी भी जिसे अंग्रेज़ों ने बैन कर दिया.  उसके वंशजों ने सौ साल बाद वो आपबीती खोज निकाली. पढ़ाकू नितिन की इस बैठकी में जलियांवाला बाग के उसी खूनी दिन की बात हुई है. वो दिन अहम है क्योंकि उसने गांधी और भगत का नज़रिया बदल डाला था. पॉडकास्ट में बात हुई है कि उस दौर में शहर का माहौल कैसा था, अंग्रेज़ों से पंजाबी नाराज़ क्यों थे, डायर के दिमाग में चल क्या रहा था और रौलेट एक्ट वाले सिडनी रौलेट के पड़पोते ने इस घटना पर क्या कहा. आज की बातचीत में शामिल हुए हैं रिटायर्ड इंडियन डिप्लोमेट नवदीप सिंह सूरी जो उसी लड़के के पोते हैं जिसने जलियांवाला कांड अपनी आंखों से देखा.

इस पॉडकास्ट में सुनिए:

-    जलियांवाला बाग की आंखोंदेखी कविता गुम होकर 100 साल बाद  कैसे मिली?

-    जलियांवाला कांड से पहले अमृतसर में क्या देखकर अंग्रेज़ घबराए थे?

-    पहले विश्व युद्ध में अंग्रेज़ों को सिपाही देनेवाला पंजाब क्यों नाराज़ था? 

-    रौलेट एक्ट बनानेवाले सिडनी रौलेट के पड़पोते ने जलियांवाला पर क्या कहा?

-    डायर अंग्रेज़ों के लिए खलनायक था या नायक?

-    क्या अंग्रेज़ों ने कभी जलियांवाला बाग के लिए माफी मांगी?

-    डायर ने अपनी करतूत के बाद जांच समिति के सामने क्या कहा?

-    डायर के दिमाग में जलियांवाला कांड के वक्त क्या रहा होगा?

-    जलियांवाला बाग में रंग रौगन के बाद क्या बदल गया है?

-    जिन वजहों से रौलेट एक्ट का विरोध हुआ क्या वो अब भी मौजूद हैं?

किताबें जिनका ज़िक्र इस बातचीत में आया

1. Jallianwala Bagh: A Groundbreaking History of the 1919 Massacre

2. जस्टिन रौलेट का लेख

3. Khooni Vaisakhi: A Poem from the Jallianwala Bagh Massacre, 1919

4. A Life Incomplete

5. जलियांवाला बाग के मेकओवर पर नवदीप सिंह सूरी का लेख

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