
जीने का हक़ सभी को है, ये तो हमारा संविधान भी कहता है. लेकिन बार-बार इसका उल्लंघन होना हमें सवाल पूछने मजबूर करता है. कुछ ही दिन पहले, नोएडा के सोफ़्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता एक हादसे का शिकार हो गए, ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में उनकी कार पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी. और ये सिर्फ़ एक घटना नहीं, रिकॉर्ड्स बताते हैं कि 2004 से 2015 के बीच क़रीब ऐसे 40 लाख मामले देखने को मिले हैं. ये आंकड़े हालात का अंदाज़ा तो देते हैं, लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. ‘पढ़ाकू नितिन’ के इस एपिसोड में हमारे मेहमान हैं केटी रवींद्रन, School of Planning and Architecture में Urban Design Department के डीन. उनसे हमने पूछा कि क्या हम अपने शहरों को अब तक Flawless क्यों नहीं बना पाए? क्यों Bangalore का Traffic अब भी बदनाम है? क्यों Monsoon आते ही बार बार ये डर सताता है कि पार्किंग में खड़ी गाड़ी डूब न जाए? पिछले साल Old Rajinder Nagar के Basement का मामला भी आपको याद होगा. तो सोचा क्यों न एक Expert से समझा जाए कि आखिर ये शहर बसाए कैसे जाते हैं? क्या इन्हें बसाते वक्त ऐसे Sustainable Methods के बारे में नहीं सोचा जाता कि Traffic न लगे. जानेंगे Noida, Gurugram, Delhi, Chandigarh, Bangalore, London, New York, Paris किस तरह से Urban Planning के लिहाज़ से शानदार या Flawed हैं. सुनिए पूरा पॉडकास्ट और हां, लाइक शेयर Subscribe करना न भूलिए
प्रड्यूस: मानव और माज़
साउंड मिक्सिंग: अमन पाल


Pilot ने खोले IndiGo और Aviation Industry के दबे राज़! : पढ़ाकू नितिन