
क्या आपने कभी किसी देवता को अपनी आंखों से देखा है? शायद आपका जवाब होगा- नहीं. लेकिन एक देवता ऐसा है, जिसे हम रोज देखते हैं. वह है सूर्य. सूर्य सिर्फ आस्था का विषय नहीं, पृथ्वी पर जीवन, ऊर्जा, समय और प्रकृति के चक्र का आधार भी है. ऋग्वेद में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है. भारतीय पुराणों में सूर्य की वंशावली, सात घोड़ों का रथ, संज्ञा और छाया की कथा, शनि और कर्ण से उनका संबंध तथा रामायण में वर्णित आदित्य हृदय स्तोत्र जैसे प्रसंग मिलते हैं. लेकिन सूर्य की महिमा भारत तक सीमित नहीं है. मिस्र के रा, यूनान के हेलियोस, इंका सभ्यता के इंती, मेसोपोटामिया के शमश और जापान की अमातेरासु तक...दुनिया की अलग-अलग सभ्यताओं ने सूर्य को देवता, सृष्टिकर्ता और सत्ता के प्रतीक के रूप में देखा और पूजा. तो 'बाबामंडल' के इस ख़ास एपिसोड में बात सूर्य के विज्ञान, मिथक, इतिहास, छठ और जीवन-दर्शन की. सुनिए पाणिनि आनंद बाबा से.
होस्ट: पाणिनि आनंद
प्रड्यूसर: कुमार केशव
साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह