
18 सितंबर 2026 को हरिद्वार के भूपतवाला में एक छोटे से चाय के खोखे में एक आदमी की लाश मिली। जेब से एक पहचान पत्र निकला जिसपर नाम था सुरेंद्र कोली. वही सुरेंद्र कोली, जिसका नाम करीब 20 साल तक निठारी कांड की सबसे खौफ़नाक कहानी से जुड़ा रहा. जिस पर कई हत्याओं के मामले चले, जिसे बार-बार फांसी की सज़ा सुनाई गई… और फिर वो एक-एक करके अपने खिलाफ़ चले सभी 13 मामलों में बरी हो चुका था. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. Crime Branch के इस खास एपिसोड में हम लौटते हैं 2005-06 के निठारी में, जहां बच्चों के गायब होने की शिकायतें हुईं, डी-5 के पीछे से कंकाल मिले और एक रसोइया देखते ही देखते देश के सबसे चर्चित अपराधियों में शामिल हो गया. हम बात करेंगे उस मनोवैज्ञानिक जांच की, जिसमें कोली के व्यक्तित्व और व्यवहार को लेकर कई अहम बातें सामने आईं. फिर देखेंगे कि अदालतों में उसके खिलाफ़ पेश किए गए सबूतों पर क्या सवाल उठे और आखिर क्यों उसकी सज़ा टिक नहीं पाई. और फिर सबसे बड़ा सवाल सुरेंद्र कोली की मौत कैसे हुई? पुलिस का मानना है कि उसने खुद की जान ली, लेकिन इसके भी कई पहलू हैं. इस पूरे मामले को समझिए अरविंद ओझा के साथ.