18 अक्टूबर की शाम, मुंबई का पॉश इलाका जुहू. एक्टर टाइगर श्रॉफ़ की कार को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ गोलियां चलती हैं, पांच-छह राउंड फ़ायर. खबर आग की तरह फैली और बॉलीवुड में वही खौफ़ लौट आया, जो कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड के दौर में हुआ करता था. वो दौर, जब दिनदहाड़े एक मंदिर के बाहर गुलशन कुमार को गोलियों से भून दिया गया, जब साल 2000 में राकेश रोशन पर फायरिंग हुई, और जब फिल्म इंडस्ट्री का हर बड़ा नाम धमकी भरे फोन से कांपता था. ट्रिगर तो शूटर्स के हाथ में था, लेकिन उंगली किसकी थी? सवाल गूंज ही रहा था कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट और ऑडियो सामने आया. आवाज़ अनिल पंडित की बताई गई, पानीपत से ताल्लुक रखने वाला वो गैंगस्टर, जो खुद को लॉरेंस बिश्नोई का "छोटा भाई" बताता है. वो हरमन संधू के साथ हमले की ज़िम्मेदारी लेता है और कहता है कि टाइगर को पहले समझाया गया था, लेकिन उसे समझ नहीं आया. इसी ऑडियो में सलमान खान को खुली धमकी दी गई और इंडस्ट्री के उन सभी को चेतावनी, जो सलमान के साथ खड़े होंगे. इस आवाज़ के पीछे जिस नाम की परछाईं है, वो है लॉरेंस बिश्नोई. अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद वो गैंगस्टर, जिसकी सलाखें भी उसके साम्राज्य को नहीं रोक पाईं. सिद्धू मूसेवाला की हत्या, सलमान के घर के बाहर फायरिंग, बाबा सिद्दीकी की हत्या, रोहित शेट्टी के घर पर गोलियां, जिसे गैंग ने "छोटा ट्रेलर" कहा था और अब टाइगर श्रॉफ़. तो क्या जेल की दीवारें भी उस खौफ को नहीं रोक पा रहीं, जो मुंबई 90 के दशक में झेल चुकी है? क्या बॉलीवुड पर फिर मंडरा रहा है गोलियों का साया?
Host - Arvind Ojha
Sound - Nikhil Kumar