
9 जून 2024… एक तरफ़ नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे, दूसरी तरफ़ जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों से भरी बस पर आतंकी हमला हो जाता है. इतने अहम दिन पर हुआ ये हमला महज़ संयोग तो नहीं था, बल्कि सोचा-समझा मैसेज था. लेकिन एक साल बाद ही इस हमले के मास्टरमाइंड अबु क़ताल, जो पाकिस्तान में सुरक्षित बैठा था, रहस्यमय तरीके से मारा जाता है. कुछ ‘Unknown Gunmen’ आते हैं, हमला करते हैं और बिना कोई सुराग छोड़े गायब हो जाते हैं. यही पैटर्न बार-बार सामने आता है. चाहे वो आमिर सरफ़राज़ तांबा हो, जिसने सरबजीत सिंह की हत्या की या फिर हंज़ला अदनान, जो हाफ़िज़ सईद का करीबी था. हर बार कहानी एक जैसी है - सटीक हमला, कोई क्लेम नहीं, और हमलावर गायब. तो सवाल ये है कि क्या ये कोई सीक्रेट ऑपरेशन है जो बिना नाम के चल रहा है? क्या हाल ही में आई फ़िल्म ‘धुरंधर’ की तरह कोई धुरंधर सच में तो पाकिस्तान में नहीं है? इस एपिसोड में अरविंद ओझा आपको ऐसी 4 सच्ची कहानियों के ज़रिए इसी गुत्थी को समझाने की कोशिश करेंगे.
