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उदयपुर घटना की जड़, ग़ायब होती डिटेलिंग और खुले में सोच के नुक़सान: तीन ताल, Ep 90

उदयपुर घटना की जड़, ग़ायब होती डिटेलिंग और खुले में सोच के नुक़सान: तीन ताल, Ep 90

तीन ताल के 90वें एपिसोड में कमलेश 'ताऊ', पाणिनि ‘बाबा’ और कुलदीप ‘सरदार' से सुनिए:

-असली तीन ताल क्यों 90वें एपिसोड के बाद  खुलेगा? शिव सेना कहें या शिंदे सेना? ताऊ ने उद्धव ठाकरे और शिवसेना पर बाबा से उलट भविष्यवाणी की.

-उदयपुर नृशंसता की जड़ कहां है? तथाकथित मूल्यों का लबादा ओढ़े समाज की सोच क्यों अब भी कबीलाई है? आदमी में सतत बदलाव और आदमी के बदलने के बीच का फ़र्क़.

-दण्ड और मानवीयता का घालमेल. सर कलम करना 'इस्लाम' सिखाता है या नहीं? तथाकथित एडवांस्ड देशों की गंदगी. 

-इस्लाम को किस तरह के आत्मावलोकन की ज़रूरत. किस बात पर आख़िर पार्टिशन हो गया? नफ़रत का समाधान क्या है? ताऊ क्यों धर्म को एन्जॉय करते हैं?

-क्या समाज डिटेलिंग विहीन हो रहा है? 
मिनिमलिस्ट होना क्या है. मिनिमलिस्ट होने की कीमत. मिनिमम का मैक्सिमम क्या होता है?

-जीवन में कंट्रास्ट और यूनीकनेस की अनिवार्यता. गांव के घरों की डिजाइनिंग. क्या डिजाइन की मौत होने वाली है?

-और आख़िर में तीन तालियों की चिट्ठी और प्रतिक्रियाएं.

प्रड्यूसर - शुभम तिवारी & कुमार केशव
साउंड मिक्सिंग - नितिन रावत

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