
मांसाहार सिर्फ़ खाने की चीज़ है या धर्म, जाति, शुद्धता और राजनीति का भी सवाल? मनुष्य के भोजन का इतिहास बहुत पुराना है. लेकिन भारत के खान-पान की कहानी और भी जटिल है. बाबामंडल के इस एपिसोड में पाणिनि आनंद 'बाबा' से समझिए भारत में शाकाहार और मांसाहार की कहानी वास्तव में कितनी पुरानी, जटिल और विविध है. इस पॉडकास्ट में मिलेंगे कई सुलगते हुए सवालों के जवाब. मसलन- क्या प्राचीन भारतीय परंपराओं में मांसाहार हमेशा वर्जित था? वेदों, आयुर्वेद, रामायण और महाभारत में भोजन को लेकर क्या तस्वीर मिलती है? शाकाहार कब और कैसे धार्मिक-सामाजिक पहचान से जुड़ने लगा? अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और समुदायों में खान-पान इतना अलग क्यों रहा? हमने किसी के खाने को उसके धर्म, चरित्र या श्रेष्ठता का पैमाना कब बना दिया? ध्यान रहे...यह चर्चा मांसाहार को बढ़ावा देने या शाकाहार का विरोध करने के लिए नहीं है.
होस्ट: पाणिनि आनंद
प्रड्यूसर: कुमार केशव
साउंड: सूरज सिंह

अचानक कुछ नहीं होता! जो दिखता है, उसके पीछे क्या?: बाबामंडल, Ep 11