
गालियों का समाज और समाज की गाली आजकल राष्ट्रीय विमर्श में है. बाबामंडल के इस एपिसोड में गालियों के संसार और उसके पीछे छिपे मनोविज्ञान की गहराई से हुई पड़ताल. आज के दौर में विरोध प्रदर्शनों और सोशल मीडिया पर गालियां या अपशब्द इतने आम क्यों हो गए हैं? क्या ये महज़ गुस्सा है या अभिव्यक्ति का एक नया और बेबाक तरीका? प्राचीन रोमन और ग्रीक सभ्यताओं से लेकर आज के आधुनिक समाज तक, अपशब्द या गालियां कैसे हमारी भाषा का हिस्सा बन गए? क्या गाली देना एंगर मैनेजमेंट का एक 'सेफ्टी वाल्व' है या यह केवल मानसिक हिंसा का एक रूप है? इस पॉडकास्ट में पाणिनि आनंद 'बाबा' ने गालियों के सांस्कृतिक आधार, जेंडर के नजरिए और नई पीढ़ी की बदलती भाषा पर मज़ेदार अंदाज़ में प्रकाश डाला है. भाषा, समाज और मानवीय संवेदनाओं के इस दिलचस्प रिश्ते को समझने के लिए अंत तक सुनें.
होस्ट: पाणिनि आनंद
प्रड्यूसर: कुमार केशव
साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह