पौराणिक कथाओं में वृत्रासुर का नाम दानव के रूप में लिया जाता है. लगभग संपूर्ण धरती पर वृत्रासुर का आतंक था. यह बात लोक-प्रचलित है कि राक्षस होने के बावजूद वह भगवान का परम भक्त भी था. उसकी कहानी में सिर्फ राक्षसी शक्ति की ही नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और बलिदान की भी ज़िक्र है. वृत्रासुर को इंद्र ने छल से मारने का संकल्प लिया, लेकिन इस महासंग्राम में वृत्रासुर का चरित्र देवताओं से भी अधिक महान प्रतीत हुआ. कैसे एक दानव, धर्म का प्रतीक बन गया? वृत्रासुर ने मृत्यु को क्यों स्वीकार किया? क्यों उसकी भक्ति और वैराग्य ने इंद्र को भी झुका दिया? क्या वृत्रासुर वास्तव में राक्षस था या धर्म का सच्चा रक्षक? सुनिए 'देव दानव' के छठे एपिसोड 'वृत्रासुर' में.
साउंड मिक्सिंग: सूरज सिंह