
जर्मनी… एक ऐसा मुल्क, जिसकी कभी अपनी कोई तय सीमा नहीं थी। जहाँ सैकड़ों छोटी-बड़ी रियासतें थीं, जो आपस में लड़ती थीं। फ्रांसीसी दार्शनिक वोल्टेयर ने तो यहाँ तक कह दिया था कि यह साम्राज्य न तो पवित्र है, न रोमन और न ही साम्राज्य! लेकिन फिर इसी बिखरी हुई जमीन पर आता है एक शख्स—ओटो वॉन बिस्मार्क। वह संसद में कहता है कि इतिहास के बड़े फैसले बहसों से नहीं, बल्कि “खून और लोहे” से तय होंगे। और इसके बाद शुरू होती है जर्मनी के एकीकरण और उसके एक बड़ी ताकत बनने की कहानी। एक ऐसा देश जहाँ गोएथे, कांट और बीथोवेन जैसे महान विचारक और कलाकार पैदा हुए… और दूसरी तरफ इतिहास की सबसे क्रूर और व्यवस्थित हिंसा भी यहीं देखने को मिली। जर्मनी ने दो विश्व युद्ध लड़े। यूरोप को युद्ध की आग में झोंका। खुद तबाह हुआ। दो हिस्सों में बंटा। बर्लिन की दीवार ने एक ही देश को दो हिस्सों में बांट दिया। लेकिन फिर वही जर्मनी राख से उठता है—और आज अपनी engineering, economy, industry और institutions के दम पर यूरोप की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक है। तो आखिर जर्मनी का DNA क्या है? रोमन साम्राज्य की सेनाओं को घने जंगलों में चुनौती देने वाली जर्मनिक जनजातियों से लेकर Holy Roman Empire तक… बिस्मार्क के खूनी एकीकरण से लेकर Kaiserreich तक… पहले विश्व युद्ध से दूसरे विश्व युद्ध और Germany के विभाजन तक… Berlin Wall के गिरने से लेकर आज के आधुनिक Germany तक— जर्मनी आखिर वो कैसे बना, जो वो आज है? Modern Empires Series के इस एपिसोड में हम Germany की पूरी कहानी को समझेंगे—उसके इतिहास, राजनीति, युद्ध, अर्थव्यवस्था, समाज और geopolitics के जरिए। इस सफर में हमारे साथ हैं उम्मू सलमा बावा। डॉ. बावा Germany के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक से सम्मानित हैं, Ministry of External Affairs के Foreign Service Institute में Guest Faculty रही हैं और UGC Europe Area Studies Programme की Director रह चुकी हैं। तो चाय या कॉफी का कप उठाइए, earphones लगाइए और चलिए इतिहास के उस घने जंगल में… जहाँ से एक आधुनिक साम्राज्य के जन्म की कहानी शुरू होती है।