
भारत में ज़्यादातर लोग घर इसलिए नहीं खरीदते क्योंकि उन्हें सच में घर की ज़रूरत होती है, बल्कि इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें खरीदना चाहिए. ‘प्रॉपर्टी से फायदा’ के इस एपिसोड में हम बात कर रहे हैं Emotional Buying की - उस फैसले की, जो दिल से लिया जाता है, लेकिन जिसकी कीमत दिमाग और जेब दोनों को चुकानी पड़ती है.
इस एपिसोड में नेहा बाथम ने बात की है रवि सिन्हा से, जो एक रियल रियल स्टेट जर्नलिस्ट हैं और लंबे समय से प्रॉपर्टी खरीदारों के पक्ष में लिखते रहे हैं और builders से सवाल उठाते रहे हैं.
इस बातचीत में आप जानेंगे:
- लोग घर ज़रूरत से ज़्यादा भावुकता और दबाव में क्यों खरीदते हैं.
- Emotional buying क्या है और कौन-सा डर खरीदार से गलत फैसला करवाता है.
- बिल्डर emotions को कैसे बेचते हैं.
- किराए के घर या खुद के घर में क्या है समझदारी वाली फैसला.
अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं, तो ये एपिसोड आपके लिए ज़रूरी है.
प्रड्यूसर: पारुल चंद्रा
साउंड मिक्सिंग: अमन पाल

घर खरीदने के चक्कर में लाखों-करोड़ों के नुकसान से कैसे बचें: PSF