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Draupadi की बेइज़्ज़ती, Gandhari की Insecurity, Kunti का Virginity वरदान: Padhaku Nitin

Draupadi की बेइज़्ज़ती, Gandhari की Insecurity, Kunti का Virginity वरदान: Padhaku Nitin

महाभारत की कहानी को अगर स्त्रियों की नज़र से देखा जाए, तो क्या कुछ बदल जाएगा? क्या द्रौपदी, गांधारी, कुंती और सत्यवती की नज़र से महाभारत की नई परतें खुलती हैं? क्या इस महागाथा की स्त्रियां महज़ निमित्त मात्र थीं, या उनके बिना महाभारत की कहानी अधूरी है?

इतिहास हो, कोई घटना या कोई किरदार—उसे समझने के लिए अलग-अलग नज़रियों से देखना ज़रूरी है। आचार्य चतुरसेन ने अपने उपन्यास ‘वयं रक्षामः’ में रामायण की कहानी को रावण के नज़रिए से देखा, तो मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कृति ‘यशोधरा’ में बुद्ध की कहानी को उनकी पत्नी यशोधरा की नज़र से प्रस्तुत किया।

तो फिर महाभारत को उसकी स्त्रियों की नज़र से पढ़ने पर क्या दिखाई देता है? इस महागाथा में द्रौपदी, गांधारी, कुंती, गंगा, अंबा, अंबालिका, सत्यवती, माद्री और उत्तरा जैसी स्त्रियों की अपनी इच्छाएं, संघर्ष, दर्शन और सवाल क्या थे? क्या वे केवल पुरुषों के फैसलों और युद्धों के बीच मौजूद पात्र थीं, या महाभारत की पूरी कहानी को दिशा देने में उनकी भी निर्णायक भूमिका थी?

पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में बात महाभारत की स्त्रियों की। उनके मन, उनके दर्शन, उनकी पीड़ा, उनके संघर्ष और उनके किरदारों की उन परतों को समझने की कोशिश, जिन पर अक्सर पर्याप्त चर्चा नहीं होती।

हमारे साथ हैं सुमन केशरी जी, जो पिछले तीन दशकों से महाभारत की स्त्रियों पर लेखन और चिंतन कर रही हैं। उन्होंने इन स्त्रियों पर कविताएं लिखी हैं, नाटक रचे हैं और उनके जीवन-दर्शन को समझने की कोशिश की है। उनके नाटकों में गांधारी, हिडिंबा और सावित्री जैसे पात्रों की दुनिया खुलती है, जबकि उनके कविता-संग्रह ‘निमित्त नहीं’ की कविताएं इन स्त्रियों के अनुभवों और अस्तित्व को समर्पित हैं।

क्या महाभारत की स्त्रियां सचमुच निमित्त मात्र थीं? या फिर उनकी कहानियों को समझे बिना हम महाभारत को पूरी तरह समझ ही नहीं सकते?

सुनिए पढ़ाकू नितिन का यह विशेष एपिसोड।
 

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Listen and follow पढ़ाकू नितिन