
Gangs of Wasseypur का एक बहुचर्चित सीन है. जिसमें रामाधीर सिंह जी इस बात का वर्णन करते हैं कि सिनेमा का समाज से रिश्ता क्या है? और आप भी जानते ही हैं. चाहे पापा की दी हुई घुड़की पर तड़कता भड़कता दिलीप कुमारनुमा कमबैक देना हो, या गर्लफ्रेंड की आंखों की तारीफ़ करके रिश्ते मधुर बनाने हों. Filmein और अगर आयाम को थोड़ा बड़ा करें तो पॉप कल्चर इसमें हमेशा काम आया है. इस बात को तो आप भी चलते फिरते कह ही देते हैं हम लोग. लेकिन आज पढ़ाकू नितिन के इस एपिसोड में 90s के दशक पर बात करेंगे. समझेंगे कि जब दुनिया और देश में इतना कुछ बदल रहा था. तभी म्यूज़िक सिनेमा टीवी शोज़ और Ads इतने क्यों बदले? 90s के वो गाने इतने पसंद क्यों आते हैं? Late 90s के Rock Bands, Indie Bands आज भी इतने अचानक से रील्स पर क्यों चल निकलते हैं? क्या इस बड़े रिव्ल्यूशन के पीछे एक बड़ा कारण इकॉनमी और पॉलिटिक्स भी है? और इसका राज़ भी खोलेंगे कि 90s के गानों को रिमिक्स करके आदित्य धर जैसे फिल्म मेकर्स क्यों इस्तेमाल करते हैं? आपको पता चलेगा कि इसकी भी पॉलिटिक्स है! हमारे साथ हैं प्रॉफेसर, हिस्टोरियन, पॉप कल्चर Enthusiast Arup Chatterjee. फिलहाल OP Jindal University में पढ़ाते हैं. प्रतिष्ठित अखबारों के लिए बड़े इंट्रेस्टिंग आर्टिकल्स लिखते हैं. 3 किताबें लिख चुके हैं. सुनिए पूरा एपिसोड

Bestselling Crime Author ने खोल दी Dhurandhar 2 की पोल!: पढ़ाकू नितिन

आपकी ज़िंदगी से 8 साल खा रहे प्रदूषण को कौन रोक नहीं रहा? : पढ़ाकू नितिन