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साहिर लुधियानवी, वो शायर जिसके गीत ज़माने के थे, लेकिन तल्ख़ियां अपनी थीं: नामी गिरामी, Ep 87

साहिर लुधियानवी, वो शायर जिसके गीत ज़माने के थे, लेकिन तल्ख़ियां अपनी थीं: नामी गिरामी, Ep 87

साहिर लुधियानवी, वो शायर जिसे किसी ने मुहब्बत का शायर कहा तो किसी ने बग़ावत का परचम. किसी ने उसकी नज़्मों को इंक़लाब की तहरीर माना तो किसी ने रूमानियत का झोंका लेकिन हर शक्ल में साहिर लुधियानवी का रंग अपने हमवक़्त शायरों से अलग रहा. ज़ाती ज़िंदगी की तल्ख़ियों को ग़ज़ल ओ नज़्म में पिरोकर दुनिया के नाम कर देने वाले साहिर की 100वीं सालगिरह पर सुनिए ‘नामी-गिरामी’ का ये ख़ास एपिसोड, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.

प्रड्यूसर: शुभम तिवारी
मिक्सिंग: सचिन द्विवेदी

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