
सड़क पर टहलते उस आदमी ने मुझसे कहा कि आप मेरी मदद कर सकते हैं क्या? मैं समझ गया कि ये आदमी अब मुझसे कहेगा कि इसका पर्स कहीं गिर गया है या फिर ये दूसरे शहर का है और पैसे कहीं खो गए हैं या ऐसी ही कोई बात कहेगा और मुझसे पैसे मांगेगा. मैंने भी सोच लिया था कि मैं उसे पैसे बिल्कुल नहीं दूंगा क्योंकि ऐसे ठगों को मैंने खूब देखा है. मैंने कहा, "बताइये क्या मदद चाहते हैं?" वो मेरी देखते हुए बोला, "मेरा नाम सागर है, मैं एक राइटर हूं. क्या आप मेरा ऑटोग्राफ ले सकते हैं प्लीज़?" - सुनिए 'स्टोरीबॉक्स' की नई कहानी 'सागर साहब का ऑटोग्राफ़' जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से.









